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Problems Title
100 World's Greatest Speeches

100 World's Greatest Speeches

When John F. Kennedy stood in front of his countrymen and inspired them to ask themselves what they could do for their country, when Subhash Chandra Bose demanded blood for freedom, when Frederick Douglass scoffed at the irony of a black man speaking at the Fourth of July celebrations, the power of their spoken word left their audience spellbound.
Taking you on a journey into the world of rhetoric, this priceless edition encapsulates speeches that have lasted through the ages. From those delivered to make peace to those delivered during wars, from religious orations to political oratory, this edition features iconic personalities such as Pericles, Queen Elizabeth, George Washington, Abraham Lincoln, Emmeline Pankhurst, Mahatma Gandhi, Nelson Mandela, Barack Obama and many more.

Sharia

Sharia

शरिया कानून इस्लामवादियों की प्रमुख मांग रही है। मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग इसे लागू करवाने के लिए प्रयासरत रहता है। वैसे, आधुनिक कानूनों और मानवाधिकारों की मान्यता के युग में ये कानून उचित नहीं लगते। इसके बावजूद कट्टरपंथी तत्व चाहते हैं कि शरिया कानून ही लागू हो। शरिया कानून कैसे बने और इस्लाम में इसे कैसे जगह दी गयी, इस पर लेखक ने खोज परक दृष्टि डाली है। वर्तमान समय में बहुचर्चित और विवादास्पद हो चुके शरिया कानूनों को समझने में यह अत्यंत उपयोगी पुस्तक है।

Riding the Wind: A Test Pilot's Story

Riding the Wind: A Test Pilot's Story

The book is essentially an autobiographical narrative of the author`s experiences as a Fighter pilot and a Test pilot, spanning over his entire flying career of 50 long years, containing unique experiences of historical value. The book perforce contains technical aspects of various types of aircraft flown and tested by him; Trainers, Fighters, Bombers, Transport aircraft, Helicopters, Sailplanes, and Hang Gliders. An effort has been made to present the same in as simple a manner as possible so that even a lay reader can get a fair idea of what Fighter flying and Test flying entails. There are numerous accounts of life-threatening emergencies faced by the author as well as some uncommon dare-devilry indulged in. There is also a spattering of events other than flying, which would give the reader a flavor of the type of life and times the author has been through during his flying years.

Pedagogy of the Heart (Bloomsbury Revelations)

Pedagogy of the Heart (Bloomsbury Revelations)

Pedagogy of the Heart represents some of the last writings by Paulo Freire. In this work, perhaps more so than any other, Freire presents a coherent set of principles for education and politics. For those who have read Freire’s other works the book includes new discussions of familiar subjects including community, neoliberalism, faith, hope, the oppressed and exile. For those coming to Freire for the first time, the book will open up new ways of looking at the interrelations of education and political struggle. Freire reveals himself as a radical reformer whose lifelong commitment to the vulnerable, the illiterate and the marginalized has had a profound impact on society and education today.

The text includes substantive notes by Ana Maria Araújo Freire, a foreword by Martin Carnoy and a preface by Ladislau Dowbor.

Idea

MAPPING INDIAN DIASPORA:: Contestations and Representations

This book deals with an important issue in the contemporary world-i.e., the Indian Diaspora-at a time when India is emerging as a global economic and geo-political power. The Indian Diaspora today numbers around 28 million, has a presence in nearly every part of the world and, most importantly, has a distinct identity, one that can be contrasted to other major diasporas, such as the Chinese and the Armenians. The relationship of diasporic Indians with their homeland is getting stronger as a result of the revolution in faster information and communication technologies. At the same time, the Indian Government has been encouraging linkages of diasporic Indians with India in a variety of ways. This book will be useful to sociologists, as well as scholars working in the fields of anthropology, political science, geography, history, literary, ethnic and migration studies. [Subject: India Studies, Cultural Studies, Sociology, Migration Studies]

Wadafaramoshi

Wadafaramoshi

Facts, Not Fiction, Based on RTI. इस पुस्तक ने सरकार का काम ही आसान किया है श्री वजाहत हबीबुल्लाह, (भारत के प्रथम केन्द्रीय मुख्य सूचना आयुक्त) साल 2015 में सूचना आयोग के सलाना सम्मेलन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि थे. उसमें उन्होंने कहा था कि सूचना का अधिकार कानून असल में सरकार को ही शक्ति प्रदान प्रदान करता है, क्योंकि सरकार इससे ये सीख सकती है कि जनता की समस्या क्या है, मांग क्या है, जनता के सवाल क्या है. इससे सरकार को जनता की भावनाओं का पता चलता है. सरकार को इस बारे में जानकारी मिल जाती है कि जनता के विचार क्या है और क्या सरकार वाकई ठीक से काम कर रही है या नहीं कर रही है. इस सब से सरकार अपना ही प्रदर्शन सुधार सकती है और देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जा सकती है. यानी, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं आरटीआई के महत्व को स्वीकार किया था. इस पुस्तक में भी एक तरीके से लेखकों ने सरकार का काम ही आसान किया है. ये पुस्तक सरकार के विरुद्ध कोई काम नही है. यह बताता है कि जनता ने क्या आकांक्षाएं रखी थी और सरकार ने क्या जवाब दिया है. अगर ये दिखाई भी दे कि यह सरकार के विरुद्ध है या सरकार की ये कमजोरियां है, तो सरकार को इससे सीखने की आवश्यकता है. जो सरकारी योजनाएं है, उन्हें कैसे लागू किया जा रहा है, उससे लोगों को कितना फायदा हो रहा है, क्या ये योजनाएं उन उद्धेश्यों को हासिल कर पा रही है, जिसके लिए बनाई गई थी, कहीं उसका दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है, भ्रष्टाचार तो नहीं हो रहा है, उसका विश्लेषण इस पुस्तक में दिया गया है. सरकार कहती है कि हम भ्रष्टाचार को उखाड़ फेकेंगे. इस पुस्तक में लेखकों ने सरकार को बताने की कोशिश की है कि सरकारी योजनाओं का धरातल पर क्या हाल है. इससे सरकार को ही अपनी योजनाओं का मूल्यांकन करने, अगर कोई भ्रष्टाचार है तो उसकी जांच करने, समीक्षा करने जैसे कामों में सहूलियत मिलेगी. इसलिए सरकार को इस पुस्तक का स्वागत करना चाहिए और अपनी कमजोरियों को पहचानने में इसका प्रयोग करना चाहिए. एक तरफ सरकार को पता चल सकता है कि उसकी अपनी कमजोरियां क्या है, जिसे वो दूर कर सके. दूसरी तरफ, जनता को भी पता चल सकेगा कि सरकार ने अपने वादों को पूरा करने के लिए किस हद तक काम किया. हम कह सकते है आरटीआई का इस्तेमाल करने वाले देशभक्त है. इसलिए कि वे समझते है कि सरकार को इस प्रकार चलना चाहिए कि सरकार लोगों से किए अपने वादों को पूरा कर सके. आरटीआई इस्तेमाल करते हुए जो शहीद हुए वे इसलिए शहीद हुए कि वे चाहते थे कि सरकार जनता से किए अपने वादों को, आश्वासनों को पूरा करे. पुस्तक में जैसे गंगा सफाई कार्यक्रम की समीक्षा की गई है. गंगा सफाई का कार्यक्रम कई सरकारों ने चलाया. गंगा एक्शन प्लान से ले कर नमामि गंगे तक. इस पुस्तक में लेखकों ने यह बताने की कोशिश की है कि आखिर इतने पैसे खर्च करने के बाद भी गंगा साफ क्यों नहीं हुई. क्या इसमें भ्रष्टाचार था? विशेष रूप से मौजूदा सरकार के वायदे थे कि सारा काम भ्रष्टाचार के बगैर होगा. सरकार को यह पता होना चाहिए कि इसकी वजह क्या है. सरकार को मालूम होना चाहिए कि गलती कहां हुई, पैसा कैसे खर्च हुआ. इस पुस्तक में सरकार के जवाब को ही लिखा गया है. इसमें लेखकों ने अपनी तरफ से कोई जवाब नहीं दिए है. लेखक ये नहीं कह रहे है कि सरकार ने झूठ बोला या सच बोला. सरकार ने आरटीआई के तहत जो सूचना दी, उसी सूचना के आधार पर पुस्तक के जरिए सरकार को वस्तुस्थिति बताई जा रही है. जितने भी उदाहरण इस पुस्तक में है, वे सारे के सारे देश की प्रगति में और देश के जीवित रहने में काफी महत्वपूर्ण है. जाहिर है, जब गंगा नहीं रहेगी तो भारत कहां रहेगा. इसलिए इस पुस्तक को खारिज करना किसी के लिए भी मुश्किल होगा. आरटीआई पर तो कई पुस्तकें लिखी गई है लेकिन सरकारी योजनाओं के सन्दर्भ में आरटीआई के इस्तेमाल से, ऐसी कोई पुस्तक नहीं लिखी गई है. अभी तक सरकारी कार्यक्रमों का इस तरह से किसी ने जायजा नहीं लिया है. मेरे विचार से हर एक सरकार के कामकाज का इसी तरह से जायजा लिया जाना चाहिए कि किसी सरकार ने 5 साल में क्या काम किया, कैसा काम किया, अपना वादा पूरा कर सकी या नहीं. पहले इस काम के लिए कोई तरीका नहीं था. लेकिन अब आरटीआई है. इस दिशा में लेखकों ने पहली बार इस तरह का काम किया है. मेरे ख्याल से इसे ले कर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

Indira Gandhi an era of constitutional Dictatorship

Indira Gandhi an era of constitutional Dictatorship

"Indira Gandhi was India's Prime Minister for 16 years. Her legacy is highly controversial. She caught the imagination of the people with the liberation of Bangladesh and defeating Pakistan in the ensuing war, but what was gained in the Bangladesh War was lost in the Simla Accord with Pakistan. Her most significant achievements were in the field of national security - the first atomic explosion in 1974 and active support to space programme. However, it was not easy to remain at the peak of popularity and the descent was quick and perilous. Indira Gandhi was the anti-thesis of her father. While Nehru nurtured parliamentary democracy, was instrumental in giving the country constitutional rights, norms and proprieties, and was an institution-builder, Indira Gandhi mindlessly destroyed institutions vital for sustenance of democracy, imposed emergency and rewrote even the basic structure of the Constitution, only to consolidate her power base. She had scant regard for rule of law and refused to take any responsibility for her actions. The book brings out the invidious role played by Pranab Kumar Mukherjee, the then Minister of State for Revenue (who later became President of India), in the detention of Maharani Gayatri Devi and raids on certain corporate houses during the emergency. With her massive popular mandate, it was blatant majoritarianism at work. But, significantly, she did not take any action on important issues, namely, appointment of Lokpal, electoral reforms, curse of defections, black money, and separation of religion from politics. It was one-woman rule, with family dynasty firmly entrenched. Her sham garibi hatao (remove poverty) slogan was her password for winning elections. Her strident leftist policies led the country astray

Unbecoming Citizens: Culture Nationhood and the Flight of Refugees from Bhutan

Unbecoming Citizens: Culture Nationhood and the Flight of Refugees from Bhutan

During the early 1990s, about 95,000 people arrived in eastern Nepal. They claimed to have come from Bhutan, and they alleged that they had been forced out of their homelands by the Bhutanese government. Very few believed them, and even now, not a single one of these refugees has returned to Bhutan. This book explains who these people are and why they left Bhutan. It also examines the broader implications of their story for a world awash with refugees.

Heretic : Why Islam Needs a Reformation Now

Heretic : Why Islam Needs a Reformation Now

The New York Times bestselling author of Infidel, Ayaan Hirsi Ali, explains why despite the strife, war, and terror in the Muslim world, there is hope that Islam itself is about to change for the better. What happened to Islamic reform? Why have al Qaeda and Boko Haram become the faces of contemporary Islam? Why has the Arab Spring devolved into a battle over sharia law? Continuing her personal journey from a deeply religious Islamic upbringing to a post at Harvard and American citizenship, Ali crafts a powerful call for an Islamic Reformation as the only way to end the current wave of global violence and repression of women. Today, millions of Muslims are wrapped in a rigid orthodoxy whereby women are denied education, girls as young as nine can be forced into legal marriages, and men are told that their futures lie not in building better, more just societies but in jihad against the infidel. Hopes for a wave of liberalization after the Arab Spring have been replaced by new authoritarianism and efforts to impose sharia law. Twitter, YouTube, and other social media have become aggressive platforms to promote a harsh brand of Islamic fundamentalism, making the clash between secular and Islamic society one of the most important challenges of our time. And yet, contrary to conventional wisdom in the West, Ayaan Hirsi Ali believes that ordinary Muslims throughout the world want wholesale change. Courageously engaging fundamentalists on their own turf-religion itself-she boldly calls for a Muslim Reformation, identifying five key amendments to Islamic doctrine that must be made in order to break from 7th century traditions and fully engage with the 21st century. Interweaving her personal journey, historical parallels, and powerful examples from contemporary Islamic societies and cultures, Heretic will forever change the debate over Islam and its future.

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